में नहीं तो कौन? अब नहीं तो कब? If not me, then who? If not now, then when?

मैं नहीं तो कौन? आज नहीं तो कब?

राहुल की उम्र सिर्फ २२ साल थी। दिल्ली के एक छोटे से किराए के कमरे में रहता था। दिन में इंजीनियरिंग की पढ़ाई, शाम को ट्यूशन पढ़ाकर पेट पालता था। उसके पिता उत्तर प्रदेश के एक गाँव में बीमार पड़े थे। माँ रोज फोन करके कहतीं, "बेटा, दवा का पैसा भेज दे, कल से दुकान भी बंद करनी पड़ेगी।" एक शाम, राहुल बस स्टॉप पर खड़ा था। बारिश हो रही थी। उसके सामने एक छोटी सी बच्ची भीगती हुई खड़ी थी, स्कूल की किताबें सिर पर रखे। उसकी आँखें देखकर राहुल को अपनी छोटी बहन याद आ गई। उसने अपना छाता बच्ची को दे दिया। "दीदी कहाँ है?" उसने पूछा। बच्ची ने सर झुकाकर कहा, "दीदी तो दो साल पहले... स्कूल जाते वक्त बस के नीचे आ गई थी। पापा कहते हैं, सड़क ठीक नहीं थी।" राहुल के सीने में कुछ टूट गया। उस रात वह सो नहीं पाया। फोन पर देश की खबरें देख रहा था — कहीं बाढ़ में लोग डूब रहे थे, कहीं किसान आत्महत्या कर रहे थे, कहीं युवा नौकरी नहीं मिलने से टूट रहे थे। एक खबर में एक बुजुर्ग कह रहा था, "अब तो युवा ही कुछ करेंगे, हम तो थक गए।" राहुल ने आईने में खुद को देखा। आँखें लाल थीं। उसने जोर से कहा, "मैं नहीं तो कौन? आज नहीं तो कब?" अगले दिन उसने फैसला कर लिया। उसने अपनी ट्यूशन की पढ़ाई जारी रखी, लेकिन शाम को गाँव लौट गया। पिता को देखा — जो कभी पूरा गाँव का सरपंच बनना चाहते थे, आज बिस्तर पर पड़े थे। राहुल ने उन्हें बताया, "पापा, मैं नौकरी के चक्कर में नहीं फँसना चाहता। मुझे कुछ करना है।" पहले लोग हँसे। "अरे पागल, तू अकेला क्या कर लेगा?" लेकिन राहुल ने हार नहीं मानी। उसने गाँव के १५-१६ युवाओं को इकट्ठा किया। पहले तो कोई नहीं आया। फिर धीरे-धीरे लड़के और लड़कियाँ आने लगे। उन्होंने मिलकर गाँव की सड़क सुधारी। एक छोटा सा लाइब्रेरी बनाया। लड़कियों को सेल्फ-डिफेंस सिखाया। किसानों को जैविक खेती के बारे में बताया। एक दिन बड़े भाई ने कहा, "राहुल, तू अपना भविष्य खराब कर रहा है। शहर जाकर अच्छी नौकरी कर।" राहुल की आँखों में आँसू थे, लेकिन आवाज़ में जुनून था: "भैया, अगर मैं नहीं तो कौन? अगर आज मैंने कदम नहीं उठाया तो कल मेरा बेटा भी उसी सड़क पर भीगता हुआ खड़ा रहेगा, जिस पर मैं खड़ा था। अगर आज नहीं तो कब?" धीरे-धीरे बदलाव आने लगा। गाँव में बिजली नियमित होने लगी। लड़कियाँ स्कूल जाने लगीं। किसान अच्छे दाम पाने लगे। एक दिन राहुल की माँ ने उसे गले लगाकर कहा, "बेटा, तूने जो किया, वो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था।" राहुल मुस्कुराया और बोला, "माँ, मैंने अकेले कुछ नहीं किया। मैंने बस वो आवाज़ सुनी, जो हर युवा के अंदर है। मैं नहीं तो कौन? आज नहीं तो कब?" --- आज हर युवा को ये कहानी खुद से पूछनी चाहिए। देश की हालत चाहे जितनी भी खराब लगे — भ्रष्टाचार हो, बेरोजगारी हो, शिक्षा का हाल खराब हो, महिलाओं की सुरक्षा का सवाल हो — लेकिन याद रखो, परिवर्तन किसी बड़े नेता या सरकार से नहीं, बल्कि तुम्हारे अंदर के उस छोटे से जज्बे से शुरू होता है। अगर तुम पढ़ रहे हो, तो बेहतर पढ़ो। अगर तुम सोशल मीडिया पर हो, तो सही बात फैलाओ। अगर तुम गाँव में हो, तो वहाँ बदलाव लाओ। अगर तुम शहर में हो, तो ईमानदारी से काम करो। **क्योंकि यह देश तुम्हारा है।** **इसकी तकदीर तुम्हारे हाथ में है।** **मैं नहीं तो कौन?** आज नहीं तो कब? जागो यार... समय बहुत कम है। 🔥, इस स्टाइल में इस कहानी को बना कर दें चित्रों के साथ, लिखा हुआ बिलकुल सही और साफ साफ साफ होना किये पुरे मेटर के साथ

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